नई दिल्ली : झारखंड HC ने शुक्रवार को हेमंत सरकार से पूछा कि आखिर किसके आदेश पर चारा घोटाले में सजायाफ्ता लालू यादव को राजेन्द्र आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक के, ‘केली’ बंगले में स्थानांतरित किया गया था.

लालू द्वारा रिम्स में इलाज के लिए मिली सुविधाओं के कथित दुरुपयोग से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह ने हेमंत सरकार से यह सवाल किए.

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HC ने यह भी जानना चाहा कि आखिर अस्पताल में लालू के सेवादार की नियुक्ति किस आधार पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है तथा अस्पताल में किसे सेवादार बनाया जा सकता है?

न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ में लालू से जुड़े मामले में सुनवाई के दौरान अपर महाधिवक्ता आशुतोष आनंद ने हेमंत सरकार का पक्ष रखा था.

उन्होंने अदालत को बताया कि न्यायिक हिरासत में इलाज कराने वाले कैदियों के लिए एसओपी बनाई गई है, उसी के तहत उनकी सुरक्षा की व्यवस्था की जाती है और लोगों से उनके मिलने की प्रक्रिया तय की जाती है.

HC ने हेमंत सरकार से यह भी पूछा कि कैदी से अनावश्यक लोग मिलते हैं तो इसके लिए कौन अधिकारी जिम्मेदार होगा? उच्च न्यायालय के सवालों पर अपर महाधिवक्ता ने एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय मांगा.

जिस पर इस मामले की सुनवाई HC ने 18 दिसंबर के लिए निर्धारित की, मामले की सुनवाई के दौरान CBI ने HC को बताया कि जेल नियमावली का उल्लंघन करने को लेकर लालू के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है.

इस पर HC ने कहा कि वह एक अलग मामला है, CBI ने कहा कि HC ने पिछले तीन माह में लालू से मिलने वाले लोगों की सूची भी हेमंत प्रशासन से मांगी थी, इस पर HC ने कहा कि यह सूची उन्हें मिल गई है.

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