नई दिल्ली: पीएम मोदी के लेह स्थित सेना अस्पताल जाने और वहाँ गलवान घाटी में चीनियों के साथ झड़प में घायल सैनिकों से मुलाक़ात करने पर उठे विवाद पर सेना से सफ़ाई दी है, सेना ने कहा कि पीएम सैनिकों को संबोधित करते हुए जहाँ देखे गए, वह जनरल अस्पताल का ही हिस्सा है और उसे फ़ौरी ज़रूरत के लिए एक ऑडियो वीडियो हॉल को 100 बिस्तरों वाले वार्ड में तब्दील कर तैयार किया गया था, बीजेपी और पीएम के जारी की गई तसवीरों पर विवाद खड़ा हो गया था,

सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा कि यह अस्पताल का कोई वार्ड है ही नहीं क्योंकि वहाँ मेडिसिन कैबिनेट, आईवी फ्लुइड के स्टैंड या कोई दूसरा मेडिकल इक्विपमेंट नहीं दिख रहे हैं, इसके अलावा वहाँ दीवाल से लटकता हुआ एक प्रोजेक्टर भी देखा जा सकता है, लोगों का कहना है कि जिस तरह से बिस्तर और चमकती हुई दीवालें या फर्श हैं, उससे भी ऐसा नहीं लगता है कि यह अस्पताल का वार्ड है,

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आलोचकों का कहना है कि पीएम के फोटो खिंचवाने और वीडियो बनाने के लिए तैयार किया हुआ यह नकली वार्ड है, किसी डॉक्टर रोशन आर ने ट्वीट कर कहा कि उन्हें याद नहीं आ रहा कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा कोई वार्ड देखा है जहाँ कहीं कोई मेडिकल इक्विपमेंट नहीं है, सोशल मीडिया पर एक दूसरे आदमी ने ट्वीट कर सवाल किया, ये सभी सैनिक प्रणायाम की मुद्रा में ही क्यों हैं,

सेना ने इन आरोपों का ज़ोरदार खंडन करते हुए इसे ‘दुष्टतापूर्ण’ क़रार दिया है, सेना ने कहा है, जुलाई 3 को पीएम द्वारा जनरल अस्पताल के दौरे के बारे में ‘दुष्टतापूर्ण’ और ‘बेबुनियाद’ आरोप लगाए जा रहे हैं, सेना ने कहा, यह स्पष्ट किया जा रहा है कि यह जनरल अस्पताल का ही हिस्सा है और क्राइसिस एक्सपैन्सन के तहत 100 बिस्तर की फै़सिलिटी है, सेना ने यह भी कहा कि ऑडियो वीडियो ट्रेनिंग के हॉल को ही वार्ड में तब्दील कर दिया गया था,

सेना ने यह भी कहा कि गलवान घाटी में घायल हुए बहादुर सैनिकों को कोरोना के लिए क्वरेन्टाइन किया गया था, सेना प्रमुख जनरल एम. एम. नरवणे ने भी इसी जगह आकर सैनिकों से मुलाक़ात की थी

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