नई दिल्ली : 70 सालों तक देश के किसानों का शोषण करने वाले कुछ बिचौलिये एवं राजनीति दल इस ऐतिहासिक कानून का विरोध कर भोले-भाले अन्नदाताओं को गुमराह कर रहे हैं अपने राजनीतिक हित के लिए मोदी सरकार का विरोध करते करते.

आज वह देश का विरोध कर रहे हैं जबकि कांग्रेस की सरकार के तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर इस बिल को लागू करने का दबाव बनाया था.

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पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने इस बिल का समर्थन किया था समस्त विपक्षी पार्टियों ने भोले भाले अन्नदाता को गुमराह कर सड़कों पर बैठा दिया है हाल ही में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसी बिल का समर्थन किया है आज उनका दोहरा चरित्र जनता के सामने हम उजागर करेंगे, सभी विपक्षी पार्टियां आज भोले भाले किसानों को गुमराह करके अपनी खोई हुई.

राजनीतिक जमीन को वापस पाने के लालच में किसानों के साथ मिलकर मोदी सरकार का विरोध कर रहे हैं जबकि कृषि विधेयक बिल किसानों को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगा, वर्षों से देश का किसान बिचौलियों और दलालों के बीच पीसकर रह गया था आजाद देश में हमारे देश का अन्नदाता गुलामी की जंजीरों में बंधा हुआ था.

लेकिन आज मोदी सरकार के कुशल नेतृत्व से अन्नदाता को अपनी फसल को मनचाही मंडियों में और मनचाहे दाम पर बेच सकता है इस कानून के माध्यम से किसान को अपने अनाज को बेचने की आजादी प्रदान करता है.

मोदी सरकार कृषि के क्षेत्र में नए आधुनिक उपकरण व संसाधन उपलब्ध कराके देश के अन्नदाता को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाना चाहती है जिसका सभी विपक्षी पार्टियां विरोध करते करते देश की प्रगति में रोड़ा बनकर खड़ी हो गई है यह देश हित में ही नहीं बल्कि किसान हित में एक घिनौनी एवं सोची समझी गंदी राजनीति है.

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