लखनऊ (यूपी) : UP में राज्यसभा की 10 सीटों पर हो रहे चुनाव के लिए BJP ने अपने आठ प्रत्याशियों के नाम का ऐलान कर दिया है, BJP ने यूपी में 9 प्रत्याशी जीतने की स्थिति में होने के बाद भी आठ प्रत्याशी उतारे हैं, जिसे BSP को वॉकओवर देने का दांव माना जा रहा है, BJP ने राज्यसभा चुनाव में अपने कोर वोटबैंक का खास ख्याल रखा है और जातीय समीकरण साधने के साथ-साथ नए चेहरों को भी मौका दिया है, यही नहीं कांग्रेस छोड़कर BJP में आए अमेठी के राजा संजय सिंह को तगड़ा झटका लगा है, क्योंकि BJP ने उन्हें राज्यसभा का प्रत्याशी नहीं बनाया है.

UP में 9 नवंबर को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए BJP की केंद्रीय चुनाव समिति ने सोमवार देर रात 8 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की, इसमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, बृजलाल, नीरज शेखर, हरिद्वार दुबे, गीता शाक्य, बीएल शर्मा और सीमा द्विवेदी को उम्मीदवार बनाया गया, BJP ने दो राजपूत, दो ओबीसी, दो ब्राह्मण, एक दलित और एक सिख समुदाय के प्रत्याशी के जरिए जातीय समीकरण साधने की कवायद की है. BJP ने जातीय संतुलन साधने के साथ बृजलाल, गीता शाक्य और बीएल वर्मा जैसे नये चेहरों को भी मौका दिया है, सेवानिवृत डीजीपी बृजलाल दलित समुदाय से आते हैं और मायावती के करीबी माने जाते थे, लेकिन उन्होंने अपना सियासी सफर BSP की बजाय BJP के साथ शुरू किया, हाल ही में हाथरस मामले में जिस तरह से विपक्ष ने BJP को दलित राजनीति के नाम पर घेरने की कोशिश की थी, ऐसे में पार्टी ने बृजलाल को राज्यसभा भेजकर दलित समुदाय को सियासी संदेश देने की कोशिश की है.

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UP में ब्राह्मण राजनीति को लेकर विपक्ष लगातार योगी सरकार पर हमलावर है, ऐसे में BJP ने UP से राज्यसभा में दो ब्राह्मण उम्मीदवारों को भेजने का दांव चला है, जिसमें पूर्व मंत्री हरिद्वार दुबे और पूर्व MLA सीमा द्विवेदी का नाम शामिल है, दुबे UP में कल्याण सरकार में वित्त राज्य मंत्री रहे हैं और उनकी गिनती आगरा के वरिष्ठ BJP नेताओं में होती है, हालांकि, मूलरूप से वे बलिया के रहने वाले हैं और सीतापुर, अयोध्या और शाहजहांपुर में RSS के जिला प्रचारक रहे हैं, वहीं, सीमा द्विवेदी जौनपुर के मुंगरा बादशाहपुर से दो बार MLA रह चुकी हैं. 


BJP ने राजपूत समुदाय से राज्यसभा के दो प्रत्याशी बनाए हैं, BJP के राष्ट्रीय महामंत्री, महासचिव तथा केंद्रीय कार्यालय प्रभारी अरुण सिंह के साथ पूर्व PM स्वर्गीय चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर को फिर से राज्यसभा में भेजने का फैसला लिया है, नीरज शेखर ने पिछले साल SP छोड़कर BJP का दामन थामा था, वहीं, डॉ, संजय सिंह के राज्यसभा जाने के अरमानों पर पानी फिर गया है, संजय सिंह ने पिछले साल कांग्रेस के साथ राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर BJP का दामन थामा था, ऐसे में माना जा रहा था कि पार्टी उन्हें राज्यसभा भेजेगी, लेकिन सूबे में जिस तरह से ठाकुरों को लेकर BJP निशाने पर है, ऐसे में दो से ज्यादा प्रत्याशी बनाने पर सवाल खड़े होते, लगता है यही वजह है कि पार्टी ने उन्हें राज्यसभा का प्रत्याशी नहीं बनाया. BJP ने 2022 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए राज्यसभा प्रत्याशी के चयन का फैसला किया है, BJP ने ओबीसी समुदाय से दो राज्यसभा कैंडिडेट बनाए हैं, औरैया की जुझारू नेता गीता शाक्य के जरिए पार्टी नेतृत्व ने महिला और पिछड़ा कोटा पूरा करने के साथ बुंदेलखंड को भी प्रतिनिधित्व प्रदान किया है, ऐसे लोध समुदाय से आने वाले बीएल वर्मा को प्रत्याशी बनाया गया है, वर्मा पूर्व सीएम कल्याण सिंह के करीबी माने जाते हैं और यूपी में लोध समुदाय BJP का परंपरागत वोटर माना जाता है, इस तरह से BJP ने सूबे के पिछड़ा वर्ग को भी सियासी संदेश देने की कवायद की है.  

BJP ने सूबे में 8 राज्यसभा कैंडिडेट उतारे हैं जबकि पार्टी 9 सदस्य जिताने की स्थिति में थी, SP और BSP के मैदान में एक-एक उम्मीदवार उतारने के बाद अब कुल 10 प्रत्याशी मैदान में होंगे, ऐसे में कोई निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में नहीं आता है तो सभी का निर्विरोध निर्वाचन तय है, हालांकि, पहले माना जा रहा था कि BJP 9 प्रत्याशी उतारेगी, लेकिन 8 नामों का ऐलान करके सभी को चौंका दिया है, इस बीच कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि BJP ने BSP के उम्मीदवार को समर्थन देने के लिए अपनी एक सीट खाली छोड़ी है, दरअसल, UP में BSP के पक्ष में समीकरण न होते हुए भी पार्टी की तरफ से रामजी गौतम ने नामांकन दाखिल किया है, लेकिन BJP के दांव से अब राज्यसभा में BSP की राह आसान लग रही है, BJP उम्मीदवार की लिस्ट जारी होने के बाद UP कांग्रेस ने ट्वीट किया, ‘BJP की हालत पतली है, BSP उपचुनावों में BJP को वोट ट्रांसफर करे इसके लिए BSP-BJP के छुपन-छुपाई गठबंधन का ऐलान हुआ, UP विधानसभा में मौजूदा सदस्य संख्या के आधार पर जीत के लिए उम्मीदवार को 36 वोटों की आवश्यकता होगी, BJP के आठ उम्मीदवारों की जीत तो तय है लेकिन पार्टी ने अभी अपने सारे पत्ते नहीं खोले हैं, ऐसे में सभी की नजरें मंगलवार को नामांकन के आखिरी दिन पर टिकी है और अगर निर्दलीय कोई नहीं उतरता है तो फिर सभी का निर्विरोध निर्वाचन तय है.

ब्यूरो रिपोर्ट. लखनऊ

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