नई दिल्लीः  गोरखपुर अस्पताल त्रासदी से चर्चा में आए डॉ. कफील खान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची यूपी सरकार को झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया है। बता दें कि यूपी सरकार डॉक्टर कफ़ील के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।विवादित नागरिकता क़ानून के खिलाफ बोलने पर उनके खिलाफ नैशनल सिक्यॉरिटी ऐक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने डॉ. कफ़ील खान पर से NSA को हटाने और रिहा करने का आदेश दिया था।

चीफ जस्टिस एसएस बोबड़े ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के डॉ. कफील को रिहा किए जाने के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा, ‘आपराधिक केस उसके नेचर के हिसाब से बनेगा। आप किसी और मुकदमे के नाम पर किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकते।’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने अच्छा आदेश दिया है। इस आदेश में दख़ल देने की कोई वजह नहीं है।

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जानकारी के लिये बता दें कि एक सितंबर को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एनएसए के तहत कफ़ील खान की हिरासत को खत्म कर दिया था। इसके खिलाफ यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया लेकिन निराशा हाथ लगी। फरवरी में गोरखपुर के निवासी डॉक्टर कफ़ील को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में सीएए के खिलाफ भाषण देने और लोगों को भड़काने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। शहर में डर का माहौल बनाने और कानून व्यवस्था का उल्ल्ंघन करने का आऱोप लगाते हुए मुकदमा नैशनल सिक्यॉरिटी ऐक्ट के तहत दर्ज किया गया था।

इसके बादहाई कोर्ट ने हिरासत में लेने के आदेश को निरस्त कर दिया था और कहा था कि डॉक्टर कफ़ील के भाषण में ऐसी कोई बात नहीं थी जो कि हिंसा को बढ़ावा देती हो। पहले डॉक्टर कफील पर कई धार्मिक संगठनों को उकसाने का आरोप लगा था जिस मामले में उन्हें फरवरी में जमानत मिल गई थी। यूपी सरकार का कहना है कि पहले भी डॉ. कफील अपराध करते रहे हैं। इसी वजह से अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें नौकरी से निकाला गया था। बता दें कि एनएसए के तहत सरकार बिना चार्ज के ही किसी को भी हिरासत में ले सकती है। इसके तहत देश की सुरक्षा का हवाला दिया जाता है।

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