Header advertisement

THN स्पेशल समाचार

image

रवीश का लेख : माइनस जीडीपी वाले भारत का पहला बजट जिसे शानदार बताया जा रहा है

तालाबंदी के कारण निवेश बैठ गया। नौकरी चली गई। सैलरी घट गई। मांग घट गई। तब कई जानकार कहने लगे कि सरकार अपना खर्च करे। वित्तीय घाटे की परवाह न करे। इस बजट में निर्मला सीतारमण ने ज़ोर देकर कहा कि हमने ख़र्च किया है।…

image

रवीश का लेख : क्या भारत में प्रेस की आज़ादी बिल्कुल ख़त्म हो जाएगी?

रवीश कुमार मनदीप पुनिया की गिरफ़्तारी से आहत हूँ। हाथरस केस में सिद्दीक़ कप्पन का कुछ पता नहीं चल रहा। कानपुर के अमित सिंह पर मामला दर्ज हुआ है। राजदीप सरदेसाई और सिद्धार्थ वरदराजन पर मामला दर्ज हुआ है। क्या भारत में प्रेस की आज़ादी…

image

रवीश का लेख : ग़ुलाम मीडिया के रहते कोई मुल्क आज़ाद नहीं होता, गोदी मीडिया से आज़ादी ही नई आज़ादी…

मेरी यह बात लिख कर पर्स में रख लें। गाँव और स्कूल की दीवारों से लेकर बस, ट्रैक्टर और ट्रक के पीछे भी लिख कर रख लें। इसका मीम बना कर लाखों लोगों में बाँट दें। मेरी राय में सच्चा हिन्दुस्तानी वही है जो गोदी…

image

रवीश का लेख : क्यों की बीजेपी विधायक ने किसानों को जूते मारने की बात

मुज़फ़्फ़रनगर की महापंचायत में बड़ी संख्या में किसान जमा हो गए। इस महापंचायत के पहले गोदी मीडिया ने मोदी की रैली की तरह दिन रात कवरेज से माहौल नहीं बनाया था। सिर्फ़ एक एलान पर कई हज़ार किसान जमा हो गए। यह पंचायत पश्चिम यूपी…

image

लेख : आजाद भारत में पहली बार किसानों ने मोदी सरकार को दिखाया आईना: डॉ. अनिल कुमार मीणा

भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब किसान और सत्ता आमने -सामने है एक तरफ़ मशीनरी है तो दूसरी तरफ खेत जोतने वाले किसान है। देश के किसान दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर प्रेड से तिरंगे झंडे को सलामी देना चाहते थे…

image

लेख : ये दौर हथियारों से जंग का नहीं बल्कि क़लम और कर्सर की जंग का है: कलीमुल हफ़ीज़

तालीम एक ऐसा टॉपिक है जिसपर जितना लिखा जाए कम है। यही हाल इल्म के फैलाव और उसकी गहराई का है कि जितना हासिल कर लिया जाए कम है। तालीम के साथ तालीमी नज़रियात भी चलते हैं। फ़िक्र ही इन्सानों को अलग-अलग ख़ानों में बाँटते…

image

रवीश का लेख : भारत माता की जय के पवित्र नारे को अर्णब गोस्वामी से बचाइये

भारत माता की जय। पवित्र नारा है। इस नारे को बोलते हुए जवान सीने पर गोलियाँ खा लेते हैं। इस नारे में भारत का विराट सामर्थ्य समाहित है। जब कोई झूठ और कपट से भारत माता की जय बोलता है तो इस नारे की पवित्रता…

image

लेख : देश को परेशानियों भरी इस हालत को पहुँचाने में एक दो दिन का वक़्त नहीं, बल्कि एक लम्बा…

देश के हालात को हर समझदार नागरिक अच्छी तरह जानता और समझता है। अब इसमें कोई शक नहीं है कि हमारे देश हिन्दुस्तान के लोकतान्त्रिक मूल्य पुरानी गाथा बनकर रह गए हैं। देश के चौकीदार का वो नारा जिसमें सबके विकास और विश्वास की बात…

image

कल और आज में कोई पॉज़िटिव बदलाव नहीं, तो फिर रौशन मुस्तक़बिल की उम्मीद नहीं : कलीमुल हफ़ीज

कलीमुल हफ़ीज लीजिये कैलेंडर बदल गया और 2021 आ गया। 2020 जिन हालात में गुज़रा है उनको देखते हुए कोई भी नए साल की मुबारकबाद देने की हिम्मत नहीं करेगा। 2020 की शुरुआत ही एक तबाहकुन वायरस से हुई थी, जिसने पूरी दुनिया की कमर…

image

लेख : ताल्लुक़ात में ठंडक या बातचीत के दरवाज़े बन्द हो जाना मसायल हल करने के बजाय मसायल पैदा करता…

मोदी जी की हुकूमत को सातवाँ साल चल रहा है। कहने को तो उन्होंने सबका साथ सबका विकास की बात कही थी बल्कि दूसरी मीक़ात में तो एक जुमला और जोड़ दिया था यानी सबका विश्वास। मगर पूरे दौरे-हुकूमत पर नज़र डालिये तो न विकास…