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THN स्पेशल समाचार

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कल और आज में कोई पॉज़िटिव बदलाव नहीं, तो फिर रौशन मुस्तक़बिल की उम्मीद नहीं : कलीमुल हफ़ीज

कलीमुल हफ़ीज लीजिये कैलेंडर बदल गया और 2021 आ गया। 2020 जिन हालात में गुज़रा है उनको देखते हुए कोई भी नए साल की मुबारकबाद देने की हिम्मत नहीं करेगा। 2020 की शुरुआत ही एक तबाहकुन वायरस से हुई थी, जिसने पूरी दुनिया की कमर…

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लेख : ताल्लुक़ात में ठंडक या बातचीत के दरवाज़े बन्द हो जाना मसायल हल करने के बजाय मसायल पैदा करता…

मोदी जी की हुकूमत को सातवाँ साल चल रहा है। कहने को तो उन्होंने सबका साथ सबका विकास की बात कही थी बल्कि दूसरी मीक़ात में तो एक जुमला और जोड़ दिया था यानी सबका विश्वास। मगर पूरे दौरे-हुकूमत पर नज़र डालिये तो न विकास…

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लेख : हमें उन एक्सपर्टस का शुक्र अदा करना चाहिये जिन्होंने कोरोना वैक्सीन तैयार की है : कलीमुल हफ़ीज़

कोरोना को आए पूरा एक साल हो चुका है, एक साल में दुनिया के अन्दर बहुत-से बदलाव आए हैं, इनमें पॉज़िटिव बदलाव भी हैं और नेगेटिव भी, अगर एक तरफ़ दुनिया में बेरोज़गारी में बढ़ोतरी हुई है, ग़रीबी ने और ज़्यादा पाँव पसारे हैं, बाज़ार…

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किसान आंदोलः यूपी में सख्त हुआ पहरा, सपा नेता नज़रबंद

लखनऊः किसान आंदोलन के समर्थन में उत्तर प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के राज्यव्यापी धरना प्रदर्शन के मद्देनजर किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिये सुरक्षा के चाकचौबंद इंतजाम किये गये हैं। लखनऊ में सपा कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में…

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आयशा त्यागी ने क़ायम की ईमानदारी की मिसाल, लाखों की नक़दी से भरा लौटाया

वसीम अकरम त्यागी 10 दिसंबर के रोज़ लखनऊ में रहने वाली वंदना मिश्रा के परिवार में शादी थी, वे अपने घर से शादी में जाने के लिये रवाना हुईं. लेकिन इस दौरान उनका एक बैग़ जिसमें तक़रीबन दो लाख रुपये और कुछ ज्वैलरी थी वह…

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लेख : देश के हर नागरिक को किसानों के समर्थन में उतरना चाहिए, यही समय और लोकतंत्र की मांग है…

किसानों की आय दोगुनी करने वाले देश के प्रधान सेवक से पूछता हूं; सड़कों पर मरते देखकर किसान को, नींद कैसे आ रही है देश के प्रधान को? देश का अन्नदाता ठिठुरती ठंड में मौत को गले लगा रहा है और देश का प्रधान सेवक…

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लेख : ख़ानदानी और विरासत में मिली सियासत बादशाही सिस्टम में तो चल सकती है, लोकतान्त्रिक सिस्टम में ज़्यादा देर…

पार्टियाँ, तंज़ीमें और जमाअतें उस वक़्त तक ज़िन्दा रहती हैं जब तक वो अपने नज़रियात, मक़ासिद और उसूलों पर काम कर रही होती हैं, ज़िन्दगी मे बे-उसूलापन एक व्यक्ति के लिये भी नुक़सानदेह होता है और जमाअतों के लिये तो ज़हरे-क़ातिल है। हिन्दुस्तानी सियासत में…

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लेख : किसान आंदोलन पर मोदी सरकार आंख पर पट्टी बांधे रखी है

मोदी सरकार द्वारा लॉकडाउन घोषित करने के कुछ दिनों में ही लाखों श्रमिक दिल्ली से अपने घरों की ओर पैदल ही निकल पड़े क्योंकि उन्हें पता था कि उनकी मामूली जमा-पूँजी से 15 दिन भी टिकना मुमकिन नहीं था. मोदी सरकार ने न तो श्रमिकों…

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लेख : लव-जिहाद के नाम पर BJP सरकारें जनता की तवज्जोह असल मुद्दों से हटाना चाहती हैं : कलीमुल हफ़ीज़

प्यार किया कोई चोरी नहीं की’, ‘प्यार किया नहीं जाता हो जाता है’, ‘प्यार किया तो डरना क्या’ ये और इस तरह के गाने गुनगुनाना, प्यार की बातें करना जल्द ही देश के कुछ राज्यों में जुर्म और पाप में गिना जाने लगेगा, शीरीं-फ़रहाद और…

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लेख : वो राज नारायण जिन्होंने इंदिरा गांधी को धूल चटाई थी

बात वर्ष 1954 की है, आजादी के सात वर्ष बीत चुके थे, भारतीय संविधान चार वर्ष की यात्रा पूरी कर चुका था, लेकिन काशी विश्वनाथ मंदिर का दरवाजा अभी भी दलितों के लिए बंद था, उत्तर प्रदेश की कमान पंडित गोविंद वल्लभ पंत जी के…