तालीम एक ऐसा टॉपिक है जिसपर जितना लिखा जाए कम है। यही हाल इल्म के फैलाव और उसकी गहराई का है कि जितना हासिल कर लिया जाए कम है। तालीम के साथ तालीमी नज़रियात भी चलते हैं। फ़िक्र ही इन्सानों को अलग-अलग ख़ानों में बाँटते…
भारत माता की जय। पवित्र नारा है। इस नारे को बोलते हुए जवान सीने पर गोलियाँ खा लेते हैं। इस नारे में भारत का विराट सामर्थ्य समाहित है। जब कोई झूठ और कपट से भारत माता की जय बोलता है तो इस नारे की पवित्रता…
देश के हालात को हर समझदार नागरिक अच्छी तरह जानता और समझता है। अब इसमें कोई शक नहीं है कि हमारे देश हिन्दुस्तान के लोकतान्त्रिक मूल्य पुरानी गाथा बनकर रह गए हैं। देश के चौकीदार का वो नारा जिसमें सबके विकास और विश्वास की बात…
कलीमुल हफ़ीज लीजिये कैलेंडर बदल गया और 2021 आ गया। 2020 जिन हालात में गुज़रा है उनको देखते हुए कोई भी नए साल की मुबारकबाद देने की हिम्मत नहीं करेगा। 2020 की शुरुआत ही एक तबाहकुन वायरस से हुई थी, जिसने पूरी दुनिया की कमर…
मोदी जी की हुकूमत को सातवाँ साल चल रहा है। कहने को तो उन्होंने सबका साथ सबका विकास की बात कही थी बल्कि दूसरी मीक़ात में तो एक जुमला और जोड़ दिया था यानी सबका विश्वास। मगर पूरे दौरे-हुकूमत पर नज़र डालिये तो न विकास…
कोरोना को आए पूरा एक साल हो चुका है, एक साल में दुनिया के अन्दर बहुत-से बदलाव आए हैं, इनमें पॉज़िटिव बदलाव भी हैं और नेगेटिव भी, अगर एक तरफ़ दुनिया में बेरोज़गारी में बढ़ोतरी हुई है, ग़रीबी ने और ज़्यादा पाँव पसारे हैं, बाज़ार…
लखनऊः किसान आंदोलन के समर्थन में उत्तर प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के राज्यव्यापी धरना प्रदर्शन के मद्देनजर किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिये सुरक्षा के चाकचौबंद इंतजाम किये गये हैं। लखनऊ में सपा कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में…
वसीम अकरम त्यागी 10 दिसंबर के रोज़ लखनऊ में रहने वाली वंदना मिश्रा के परिवार में शादी थी, वे अपने घर से शादी में जाने के लिये रवाना हुईं. लेकिन इस दौरान उनका एक बैग़ जिसमें तक़रीबन दो लाख रुपये और कुछ ज्वैलरी थी वह…
किसानों की आय दोगुनी करने वाले देश के प्रधान सेवक से पूछता हूं; सड़कों पर मरते देखकर किसान को, नींद कैसे आ रही है देश के प्रधान को? देश का अन्नदाता ठिठुरती ठंड में मौत को गले लगा रहा है और देश का प्रधान सेवक…
पार्टियाँ, तंज़ीमें और जमाअतें उस वक़्त तक ज़िन्दा रहती हैं जब तक वो अपने नज़रियात, मक़ासिद और उसूलों पर काम कर रही होती हैं, ज़िन्दगी मे बे-उसूलापन एक व्यक्ति के लिये भी नुक़सानदेह होता है और जमाअतों के लिये तो ज़हरे-क़ातिल है। हिन्दुस्तानी सियासत में…
