डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी के छात्रों को इस बात से एतराज़ है कि आफलाइन परीक्षा ली जा रही है। मुझे एक पत्र मिला है जिसमें कहा गया है कि 20 हज़ार छात्रों ने गूगल फार्म भर कर ऑनलाइन परीक्षा लेने की…
कलीमुल हफ़ीज़ देश ने 26 जनवरी को 72वाँ गणतन्त्र दिवस मनाया है, कोरोना महामारी की वजह से हालाँकि पहले जैसी धूमधाम तो नहीं रही, फिर भी रस्म व रिवाज के अनुसार सरकारी संस्थाओं में गणतन्त्र दिवस के कार्यक्रम आयोजित किये गए। अलबत्ता किसानों के आन्दोलन…
तालाबंदी के कारण निवेश बैठ गया। नौकरी चली गई। सैलरी घट गई। मांग घट गई। तब कई जानकार कहने लगे कि सरकार अपना खर्च करे। वित्तीय घाटे की परवाह न करे। इस बजट में निर्मला सीतारमण ने ज़ोर देकर कहा कि हमने ख़र्च किया है।…
रवीश कुमार मनदीप पुनिया की गिरफ़्तारी से आहत हूँ। हाथरस केस में सिद्दीक़ कप्पन का कुछ पता नहीं चल रहा। कानपुर के अमित सिंह पर मामला दर्ज हुआ है। राजदीप सरदेसाई और सिद्धार्थ वरदराजन पर मामला दर्ज हुआ है। क्या भारत में प्रेस की आज़ादी…
मेरी यह बात लिख कर पर्स में रख लें। गाँव और स्कूल की दीवारों से लेकर बस, ट्रैक्टर और ट्रक के पीछे भी लिख कर रख लें। इसका मीम बना कर लाखों लोगों में बाँट दें। मेरी राय में सच्चा हिन्दुस्तानी वही है जो गोदी…
मुज़फ़्फ़रनगर की महापंचायत में बड़ी संख्या में किसान जमा हो गए। इस महापंचायत के पहले गोदी मीडिया ने मोदी की रैली की तरह दिन रात कवरेज से माहौल नहीं बनाया था। सिर्फ़ एक एलान पर कई हज़ार किसान जमा हो गए। यह पंचायत पश्चिम यूपी…
भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब किसान और सत्ता आमने -सामने है एक तरफ़ मशीनरी है तो दूसरी तरफ खेत जोतने वाले किसान है। देश के किसान दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर प्रेड से तिरंगे झंडे को सलामी देना चाहते थे…
तालीम एक ऐसा टॉपिक है जिसपर जितना लिखा जाए कम है। यही हाल इल्म के फैलाव और उसकी गहराई का है कि जितना हासिल कर लिया जाए कम है। तालीम के साथ तालीमी नज़रियात भी चलते हैं। फ़िक्र ही इन्सानों को अलग-अलग ख़ानों में बाँटते…
भारत माता की जय। पवित्र नारा है। इस नारे को बोलते हुए जवान सीने पर गोलियाँ खा लेते हैं। इस नारे में भारत का विराट सामर्थ्य समाहित है। जब कोई झूठ और कपट से भारत माता की जय बोलता है तो इस नारे की पवित्रता…
देश के हालात को हर समझदार नागरिक अच्छी तरह जानता और समझता है। अब इसमें कोई शक नहीं है कि हमारे देश हिन्दुस्तान के लोकतान्त्रिक मूल्य पुरानी गाथा बनकर रह गए हैं। देश के चौकीदार का वो नारा जिसमें सबके विकास और विश्वास की बात…
