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THN स्पेशल समाचार

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लेख : मुसलमानों की सियासी पार्टी के इलेक्शन लड़ने पर सवाल खड़े करना, उनके आज़ाद सियासी वुजूद से इनकार करना…

बिहार का चुनाव हो गया, नतीजे आ गए, हार-जीत के बाद जायज़ों और समीक्षाओं का काम जारी है, जायज़ा अपना कम दूसरों का ज़्यादा लिया जा रहा है, हारने वालों की तरफ़ से EVM और वोट की गिनती को लेकर शक-शुब्हे जताए जा रहे हैं…

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लेख : राष्ट्रीय प्रेस दिवस/पहरे मे पत्रकारिता, जंजीरों में जकड़ा पत्रकार, जानिये श्रमजीवी पत्रकार, गैर-पत्रकार कर्मी अधिनियम,1955 के बारे में

आज राष्ट्रीय प्रेस दिवस है सभी पत्रकार बन्धुओं को जो पत्रकारिता को शौकिया,जुनून और फर्ज के तौर पर कर रहे हैं उन्हें हार्दिक बधाई। प्रेस या अखबार और इलैक्ट्रानिक मीडिया प्रजातंत्रीय शासन के तहत आजादी से अपना काम करते हैं, लेकिन सवाल ये उठता है…

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लेख : ट्रम्प को उनके ग़ुरूर, ग़ुस्से, झूट, झुंझलाहट, स्वभाव में ठहराव की कमी, अन्याय पर आधारित पॉलिसी की वजह…

कलीमुल हफ़ीज़ अमरीका में राष्ट्रपति के चुनाव के नतीजे आ गए। रिपब्लिकन पार्टी के कैंडिडेट ट्रम्प की हार हुई। डेमोक्रेटिक पार्टी के कैंडिडेट जोज़फ़ बाइडन को कामयाबी मिल गई। इस तरह जोज़फ़ बाइडन अगले चार साल तक अमरीका के राष्ट्रपति रहेंगे। वो अमरीका के छियालीसवें…

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लेख : PM मोदी का विरोध न करने से बिहार में तेजस्वी यादव को हुआ फ़ायदा

बिहार में 2020 के विधानसभा चुनाव कई माइनों में बहुत महत्वपूर्ण कहे जा सकते हैं, सबसे बड़ी बात तो यह है कि कोरोना काल में देश में पहले चुनाव बिना किसी बाधा के सम्पन्न हो गए, चुनाव आयोग को इसके लिए बधाई, दूसरी अहम बात…

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आप थे तो मज़ा आता था ट्रंप भाई.. रवीश कुमार का पत्र, ट्रंप के नाम

श्रीयुत् महामहिम ट्रंप जी, प्रणाम, मुझे ख़ुशी है कि आप पद नहीं छोड़ना चाहते हैं। मत छोड़िए। चार साल सुपर पावर रहने के बाद कुर्सी छोड़ने का स्वाद वैसा ही है जैसे गुटखा चबाने के बीच में सुपारी की जगह मिट्टी निकल जाए। समझे में…

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नोटबंदी के चार साल : मोदी ने भारत को कपोर-कल्पनाओं का देश बना दिया है : रवीश कुमार

नोटबंदी के चार साल चार साल पहले आज ही के दिन नोटबंदी हुई थी। उसी दिन से सत्यानाश की कहानी शुरू हो गई। कई तरह के दावे हुए कि ये ख़त्म हो जाएगा वो ख़त्म हो जाएगा। मूर्खतापूर्ण फ़ैसले को भी सही ठहराया गया। बड़े…

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लेख : भारत हो या फ्रांस अवाम का क़ानून को अपने हाथ में लेना एक चिंताजनक स्थिति : मौलाना अरशद…

मौलाना सैयद अरशद मदनी यूरोप में फ्रांस भी एक देश है जिसका एक ज़माने तक पश्चिम, टयूनीशिया और अल्जीरिया आदि मुस्लिम देशों पर शासन रहा है, उस ज़माने में बहुत से मुसलमान रोज़ी-रोटी की तलाश में फ्रांस गए और वहीं बस गए, उनको वहां अब…

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लेख : BJP के छोटे से लेकर बड़े नेता अर्नब के समर्थन में बयान क्यों दे रहे हैं ? आखिर…

अफ्फान नोमानी नाम तो याद होगा पनसारे, दाभोलकर, कलबुर्गी, गौरी लंकेश, देवजी महेश्वरी, ये वह नाम हैं, जिसे लिखने-बोलने की वजह से मौत के घाट उतार दिया गया था। इस सूची में अन्य और भी नाम हैं। यह वही देश है, जहां लोगों ने अपने…

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तौहीने-रिसालत को इज़हारे-राय की आज़ादी का नाम ? : आज़ादी के नाम पर दिलों को तकलीफ़ पहुँचाना, सभ्य समाज की…

कलीमुल हफ़ीज़ फ़्रांस में हज़रत मुहम्मद (सल्ल०) का कार्टून दिखाने वाले टीचर का सर क़लम करना, सर क़लम करने वाले का पुलिस के ज़रिए शहीद किया जाना, फ़्रांस के राष्ट्रपति का टीचर के जनाज़े में शरीक होना और इतना ही नहीं इस्लाम और मुसलमानों के…

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लेख : आख़िर बिहार को दुनिया में एहतिराम का मक़ाम कब मिलेगा ? : कलीमुल हफ़ीज़

कलीमुल हफ़ीज़ बिहार का ज़िक्र आते ही जो तस्वीर दिल-दिमाग़ में उभरती है वो बड़ी दयनीय होती है। ग़ुरबत, जहालत, बीमारियाँ, बाढ़, तूफ़ान और न जाने कौन-कौन सी मुसीबतें हैं जो आए दिन बिहार में आती रहती हैं। ऐसा नहीं है कि बिहार ही देश…