अमरोहा (यूपी) : कहते है कभी की रात बड़ी तो कभी का दिन, यानि कि परिस्थितयां बदलती रहती हैं। बसपा के जिस नेता के इशारे पर पूर्व मंत्री सोमपाल सिंह एवं बसपा के कद्दावर नेता जोया के पूर्व चेयरमैन मोहमद यामीन को पार्टी से निष्कासित किया गया था अब उन्ही माननीय के इशारे पर बसपा में इनकी वापसी हुई हैं.

कहते हैं डूबते को तिनके का सहारा बहुत है शायद  बसपा भी अपनी गलतियों को सुधारने के बजाए पुराने बसपाईयों को सम्मान देने का ढोंग कर रही हैं बसपा की हालत किसी से छिपी नही हैं। बसपा में क्या होता कितना लोकतंत्र हैं मिशन कहाँ से कहाँ पहुँच गया हैं सब जानते है.

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हम बसपा की बात तो बात में करँगे पहले बसपा के एक स्थानीय नेता की बात कर ले। बसपा के  ये माननीय पिछले पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्य के टिकट बाट रहे थे। टिकट बाटने का इनका क्या मानक था ये बात भी पूरे जनपद को पता है, इनके दिए टिकटों में से कई विजयी होकर भी आये लेकिन बाद में उनमें से कई अपनी आस्था बदल गए। क्योकि उन्हें अपना घाटा पूरा करना था क्योकि उन्होंने इनकी शर्तो को पूरा करके टिकट लिया था.

इन स्वयम्बू बड़े माननीय की पार्टी में इतना बड़ा योगदान है कि ये समाज को बसपा से जोड़ने में असफल रहे हैं। ये भी बसपा के अपने खुद के बोट पर नेता बनने चले है। हालाकि अब ये सब बातें  कोई मायने नही रखती क्योकि बसपा की अपनी खुद की गलत नीतियों से परम्परगत वोट भी खिसक रहा उसे अब विकल्प के तौर पर मजबूत नेतृत्व मिलने जा रहा है.

ब्यूरो रिपोर्ट- अमरोहा

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